Tuesday, November 30, 2021
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अमीर देशों की कितनी है वास्तविक अमीरी ? 

पिछले दिनों एक खबर ने दुनिया को चौंका दिया और वह यह थी कि अमरीका को पीछे छोड़ चीन दुनिया का सबसे अमीर देश बन गया है । ये आंकड़े कंसल्टैंसी संस्था मैकेंजी की ओर से पेश किए गए हैं । यह संस्था बता रही है । कि चीन की पूंजी पिछले 20 वर्षों में 16 गुणा बढ़ी है जबकि पूरी दुनिया की तीन गुणा । 

जहां तक अमरीका का संबंध है , उसे आज तक दुनिया का सबसे धनी देश माना जाता है और यह एक तथ्य है कि सन 2000 से लेकर 2019 h तक अमरीका में ऊपर के दस प्रतिशत लोगों की पूंजी 67 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हुई है और चीन में ऊपर के 10 प्रतिशत लोगों के पास 2000 में 45 प्रतिशत पूंजी थी जो 2015 में बढ़कर 67 प्रतिशत हो गई । यह अब भी लगातार बढ़ते हुए चीन को अमरीका से आगे ले गई है । लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि चीन में गरीबों का हाल अमरीका में गरीबों से बेहतर है । 

अमरीका में 2000 से 2019 के बीच 50 प्रतिशत लोगों की पूंजी 1.8 प्रतिशत से घटकर 1.5 प्रतिशत रह गई और दूसरी ओर चीन में चीन की आधी आबादी जो गरीबों की है , की पूंजी घटकर 14 प्रतिशत से 6 प्रतिशत गई । इसका अर्थ यह है कि चाहे धन दौलत और तरक्की के पैमाने कितने ही आकर्षक क्यों न हो जाएं । 

इन सबसे देशों में भी गरीब तो गरीब ही रहे और अमीर और अमीर हो गए । लेकिन चीन में अमीरी और गरीबी में बढ़ती हुई खाई हैरान कर देने वाली है क्योंकि चीन साम्यवादी दर्शन को प्रतिबद्ध है । चीन हमेशा समाजवाद का दम भरता है । गरीब और अमीर की खाई को कम करने की कोशिश करता है । अब वहां भी अगर भारत की तरह गरीबी और अमीरी के बीच खाई बढ़ी है । 

भारत को ले लीजिए , अगर भारत में एक औसत उद्योगपति की पूंजी 90 करोड़ रुपये बढ़ी तो 12 करोड़ लोग रोजी – रोटी से वंचित हो गए । भारत में लगातार कुपोषण बढ़ रहा है , बेकारी बढ़ रही है और आम आदमी की हालत दयनीय हो रही है । अगर यही हालत दुनिया के सबसे धनी देश चीन और उसके बाद अमरीका में भी नजर आती है तो भला इस समृद्धि और सम्पन्नता का आम आदमी के लिए क्या लाभ ? 

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